समय ही हसाये समय ही रुलाय

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

समय ही हसाये समय ही रुलाय,

समय ने समय को ये क्या दिन दिखाए,

समय रूठ जाए तो सब छूट जाए,

समय ही हसाये समय ही रुलाय

ये समय हर समय रंग बदल ता रहे,

हर घडी ये नै चाल चलता रहे,

ये समय हर समय रंग बदल ता रहे,

समय ने ही कान्हा को ग्वाला बनाया,

समय ने ही वन वन राम जी घुमाये.

समय ही हसाये समय ही रुलाय

जब समय था सही लोग मिलते कई,

ये समय का फिर हर नजर फिर गई,

जिन्हे ज़िंदगी भर हमने हस्या,

वो आंसू हमारे सुखाने ना आये,

समय ही हसाये समय ही रुलाय

इस समय से बड़ा पारस तू भी नहीं,

इस समय पे किसी का वस् नहीं,

ये सच्चे वचन मेरे साई ने सुनाये समय का ये पंक्षी लौट के ना आये,.

समय ही हसाये समय ही रुलाय

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।