तु प्यार का सागर है

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॥ पावन पाठ ॥

तु प्यार का सागर है,

तेरी एक बूंद के प्यासे हम,

लोटा जो दिया तूने चले जायेगे जहा से हम,

घायल मन का पागलथी उड़ने को बेकरार,

पंख है कोमल आंख है धुंदली जाना है सागर पार,

अब तू ही इसे समजा राह भूले थे कहा से हम,

तु प्यार का सागर है, तेरी एक बूंद के प्यासे हम

इधर झूम के गाये ज़िंदगी उधर है मौत खड़ी,

कोई तो जाने कहा है सीमा उल्जन आन पड़ी ,

कानो में आन कह दे के आये कौन दिशा से हम,

तु प्यार का सागर है, तेरी एक बूंद के प्यासे हम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।