चाहे जैसे मुझे रख लो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चाहे जैसे मुझे रख लो कुछ न कहुगा मैं,

तेरा ही था तेरा ही हु तेरा रहुगा मैं,

चाहे जैसे मुझे रखलो कुछ न कहु गा मैं,

तुम्हरे नाम का मोती ही मेरी दौलत है ,

ये रुतबा और ये शोरथ भी तेरी वदोलत है,

तू है सागर मैं हु कटरा तुझ संग बहु गा मैं,

चाहे जैसे मुझे रख लो.....

मेरा मन अब नहीं लगता है जग की बातो में,

अपनी ऊँगली थमा दी मैंने तेरे हाथो में,

जिस तरफ ले चलो मुझको वही चलूगा मैं,

चाहे जैसे मुझे रख लो.......

गम की राते लगे गी जैसी सुख का सवेरा है,

बस तू एक बार जो कह दे की हां तू मेरा है,

फिर तो हर इक सितम हस कर ही सहूगा मैं,

चाहे जैसे मुझे रख लो.......

जिसकी अटकी है जान तुझमे मैं वो परनिंदा हु,

तू मेरे साथ है इस आस पे मैं जिन्दा हु,

सोनू की आस जो टूटी तो जी न सकूगा मैं,

चाहे जैसे मुझे रख लो...............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।