जय अंबे जागोद्धारिणी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय अंबे जागोद्धारिणी,

जय माते नारायणी,

जय हे दुर्गती हरिणी ,

जय जय हे व्याघ्रासिनी ॥

शुभमति दानी, शुभगति दानी,

भगवती भक्ति प्रदायिनी

मातृरूप धरी वरद शुभंकरी ,

माते चिन्मय रुपिणी ॥

सूरमुनी ध्यावत, पार न पावत,

जननी त्रिभुवन स्वामिनी

आद्या शक्ति दे भवमुक्ति,

माया मोह विनाशिनी ॥

हे गिरीनंदिनी विश्वविनोदिनी

विष्णू विलासिनी मोहिनी

शैलसुते हे रम्य कपर्दिनी

जय महिषासुर मर्दिनी ॥

गीत - संगीत : अरुण सराफ

गायन : पंडित आनंद भाटे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।