खाटू धाम की माटी म्हारै रास आ गई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कण - कण में तेरा वास प्रभु,

जो करे दुखों का नाश प्रभु ,

दुनिया भर की खुशियां मेरे पास आ गई,

थारे धाम की माटी म्हारै रास आ गई ,

कोई नहीं दिख्यो अपणो , जद तू ही नजर मनै आयो

खाटू नगरी आ बैठयो , जब मेरो जी घबरायो

पैर धरयो खाटू मै , सांस मै सांस आ गई

खाटू धाम की माटी ..

खाटू की माटी का , हमने देखा अजब नजारा

क्या निर्धन क्या सेठ , सभी को इसने पार उतारा

दुनिया सारी करके , ये विश्वास आ गई

थारे धाम की माटी ..

रेत नहीं मामूली , ये तो है संजीवन बूटी

मौज करूं दिन सांवरा , सोऊं तान के खूंटी

होली और दीवाली , बारहों मास आ गई

खाटू धाम की माटी ..

तेरी इस पावन मिट्टी में , मैं मिट्टी हो जाऊँ

सदा - सदा के लिए , तेरे इन चरणों में सो जाऊँ

" नरसी " के होंठो पे , इतनी प्यास आ गई

खाटू धाम की माटी ..

सभी श्याम प्रेमियों को .. लेखक एवं गायक .. नरेश " नरसी " ( फतेहाबाद ) की ओर से ..

!! जय श्री श्याम जी !!

भजन प्रेषक : प्रदीप " सिंघल " ( जीन्द वाले )

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।