अंग अंग झाला पांडुरंग

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॥ पावन पाठ ॥

विठल विठल विठल विठला,

पांडू रंग विठला पंडीनाथ विठाला,

विठल विठल विठल विठला,

रंगला अभंग, उधळला भक्तिरंग,

अंग अंग झाला पांडुरंग ॥

टाळ चिपळ्या संगे बोलतो मृदंग,

अंग अंग झाला पांडुरंग ॥

विठूनामाचा लागला छंद,

भाव भक्ति चे लाभले हे पंख,

आनंदे विहरु आम्ही विठू चे विहंग॥

अंग अंग झाला पांडुरंग

ध्यानी मनी आता एकचि आस, एकचि ध्यास,

पंढरीच्या वाटेवर अमुचा प्रवास,

हरी चरणाशी राहू होऊनि नि:संग॥

अंग अंग झाला पांडुरंग

गीत-संगीत-गायन : अरुण सराफ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।