मइया आयो तेरो दास रखले चरना के तू पास

सौरभ मधुकर
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॥ पावन पाठ ॥

ओ मइया आयो तेरो दास,

रखलै चरना के तू पास

आपा दोनुआ का काम निकल जासी,

तन्ने नौकर,मन्ने मालकिन मिल जासी

जगत सेठानी तू कुहावे संसार में,

चाकरी करुंगो जो मैं तेरे दरबार में

मेरो बिगड़्यो रा भाग्य सवर जासी

तन्ने नौकर,मन्ने मालकिन मिल जासी

घना ही भगत तेरी हाज़री बजावे है

देख के बिनाने मेरो मन ललचावे है

इक और राख ले,के तेरो घाट जासी

तन्ने नौकर,मन्ने मालकिन मिल जासी

कर के तू देख ले मेरे पे विस्वास माँ

खूब सेवा करस्यूँ मैं तेरी दिन-रात माँ

म्हारी सेवा स्यूं मइया तू राज़ी हो जासी

तन्ने नौकर,मन्ने मालकिन मिल जासी

छोटी सी या अरजी तू मेरी स्वीकार कर

एक किरपा और करदे मेरे परिवार पर

सेवक सोनू भव से पार उतर जासी

तन्ने नौकर,मन्ने मालकिन मिल जासी

ओ मइया आयो तेरो दास,

रखलै चरना के तू पास

आपा दोनुआ का काम निकल जासी,

तन्ने नौकर,मन्ने मालकिन मिल जासी

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।