जय हो जय हो श्री साई नाथ की

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॥ पावन पाठ ॥

आओ मिल के उठाये पालकी,

जय जय हो श्री साई नाथ की,

भाई चारे को जोड़े पालकी,

जय जय हो श्री साई नाथ की,

देविया और देवता भी सारे देखते सभी पालकी के नजारे,

चाँद सूरज चमकते सितारे पालकी को सजाते है सारे,

इक मिसाल है संसार की,

जय जय हो श्री साई नाथ की,

श्रद्धा और सबुरी को जानो साई बाबा को तुम पहचानो,

इनके वचनो को दिल में समा के सब का मालिक इक मानो,

इनकी लीला है उपकार की,

जय जय हो श्री साई नाथ की,

आओ किस्मत के मारो तुम आओ,

बंद किस्मत को अपनी जगाओ,

बात राजन की तुम आजमाओ भरलो झोली और पुण्य कमाओ,

कष्ट सारे निवारे पालकी,

जय जय हो श्री साई नाथ की,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।