हरी हरी भांग का मजा ले जीये

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हरी हरी भांग का मजा ले जीये

सावन में शिव की भुटटी पिया कीजिये,

इसकी हर पति में अज़ब खुमार है,

इस लिए भंग भोले पीते बार बार है,

भंग पिके प्रेम शिव से भड़ा लीजिये,

सावन में शिव की भुटटी पिया कीजिये,

सावन महीना तो बस एक बहाना है,

भंग भूती पीने का तो चलन पुराना है,

भंग की तरंग से ना डरा कीजिये,

सावन में शिव की भुटटी पिया कीजिये,

करामात भंग में भारी दुरी सब मिटाये रे,

भंग के दीवानो को बस नजर शिव ही आये रे,

लेके शिव का नाम घुट भरा कीजिये,

सावन में शिव की भुटटी पिया कीजिये,

इक सो आठ लोटा भंग पिके राजू गाये रे,

भंग ही पवन भगतो को शिव से भुलाये रे,

यु न आपने आपको सजा दीजिये,

सावन में शिव की भुटटी पिया कीजिये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।