इस घर के बच्चे बच्चे पर मेरे साईं बाबा का साया है

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॥ पावन पाठ ॥

दरबार एसा सजाया है,

दिन आज ख़ुशी का आया है,

आओ भगतो मिल कर नाचे कैसा शुभ दिन आया है,

इस घर के बच्चे बच्चे पर मेरे साईं बाबा का साया है,

आज खुशिया मेरे घर आई मैं तो झूम झूम बांटू वधाई,

साईं कीर्तन में धूम्माची है बाजे ढोलक मिरधंग शेहनाई,

दरबार कितना सुहाना है आज मिल कर के साईं को रीझाना है,

आओ भगतो मिल कर नाचे कैसा शुभ दिन आया है,

इस घर के बच्चे बच्चे पर मेरे साईं बाबा का साया है,

है ये भगतो की आँखों का तारा दीं दुखियो का ये ही सहारा,

पल में भगतो की बिगड़ी बनाये सारे जग है ये रखवाला,

पूरा जम कर के जोर लगाना है,

मिल कर के ताली बजाना है,

आओ भगतो मिल कर नाचे कैसा शुभ दिन आया है,

इस घर के बच्चे बच्चे पर मेरे साईं बाबा का साया है,

साईं नैना की आस पुजादे रूठी किस्मत को अब तो बना दे,

अभिनंद करे सब मिल के साईं चरणों में अपने जगह दे,

साईं शरदा का फूल खिलाना है और सबुरी की बगियाँ सजाना है,

आओ सब कोई मिल कर नाचो मौसम आज सुहाना है,

इस घर के बच्चे बच्चे पर मेरे साईं बाबा का साया है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।