आजा माँ दो घड़ियाँ करा गे गला बड़ियाँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आजा माँ दो घड़ियाँ करा गे गला बड़ियाँ,

दुःख सुन दिया मावा होर कीह्नु जा सुनावा,

अखा तेरिया रावादे विच खड़ियाँ,

आजा माँ दो घड़ियाँ करा गे गला बड़ियाँ,

अखियां दे खाली कांसे दरस ले बगी दे,

बदले गी लेख कदो मेरी तकदीर दे,

जे तू बैठे मेरे कॉल मेरे सुन लवे बोल,

गला आन के भुला दे उते अडिया,

आजा माँ दो घड़ियाँ करा गे गला बड़ियाँ,

हंजुआ दे मोती सादे पैरे विच रूल गये,

केहड़ी गलो तनु माये चेते साढ़े भूल गये,

आजा माँ दो घड़ियाँ करा गे गला बड़ियाँ,

मैनु आवे तेरी याद दिल करे फर्याद हंजू ला दे अखा दे विचि चड़िया,

आजा माँ दो घड़ियाँ करा गे गला बड़ियाँ,

लिख लिख चिठियाँ मैं भवना ते पाइयाँ ने,

आवे गा जवाब आसा दास ने लगाइयाँ नेम

केहड़ी भूल मेटो होइ बंसी करे अरजोई,

बाह्वा किसे ने नहीं मेरी फडिया,

आजा माँ दो घड़ियाँ करा गे गला बड़ियाँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।