सईया बचिया नू प्यार दुलार दे

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॥ पावन पाठ ॥

सईया बचिया नू प्यार दुलार दे देके प्यार तू चैन करार दे,

कुज होर न मंगना मैं सइयाँ मैं ता करनीया एहो कमइया,

सेवा भगति ते नेक विचार दे देके प्यार तू चैन करार दे,

सईया बचिया न प्यार दुलार दे,

होर की माँगिये सतगुरु प्यारे होर ना कोई लोड,

प्यार तेरा जे मिल जावे ते कोई वे थोड़,

प्रम पिता तू कर्म कमा के नाल तू अपने जोड़,

सईया बचिया न प्यार दुलार दे .........

दिल विच दाता आख्रिरी परसक वास करि दिन रात,

साड़ी झोली पा दे बाबा बस ओहि दाट,

रेहमत तेरी बदले न सईआं बदले हालात,

सईया बचिया न प्यार दुलार दे...

विच तूफाना तू एह साहिल तू ही आस मुराद,

सुख विच भी तू दुःख विच भी तू हर पल तू ही याद,

दिल धड़कन दी कुल जीवन दी एक तुहि बुन्याद,

सईया बचिया न प्यार दुलार दे.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।