मेरे गुरु जेहा होर कोई न

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे गुरु जेहा होर कोई न सदके जा मैं वारि जा,

गुरु मेरे दी ठंडीनि छा,सदके जा मैं वारि जा

जेहड़े आउंदे गुरु दे द्वार,

ओहना दा हो जाएव उधार,

फिर आउंदे वारम वार दिल लगदा नहीं होर किसे था ,

सदके जा मैं वारि जा....

जेहड़े गुरु दे छू लेन पैर,

ओहना दी दम दम हॉवे खैर,

हो झंडी बेरो बैर गुरु चरना विच सदा रवा,

सदके जा मैं वारि जा...

गुरु मेरा शक्ति शाली,

वो भगता दा वाली,

गुरु दी लीला न्यारी ो भगता दा प्रतिपाल,

गुरु तो वारि जा

सदके जा मैं वारि जा

ओहदे मुखड़े ते जलाल ओहदे बोलै विच कमाल,

रूह करदे मालोमाल ओह्दी सिफ़्ता करदी मैं न थका,

सदके जा मैं वारि जा ....

जद मेहर किती गुरु प्यारे ,

सपने विच आऊं हुलारे मैनु दसदे अजब नराजे,मैं कमली होके गौंडी रवा

सदके जा मैं वारि जा

गुरु वाजो धुप हनेरा गुरु मिले ता हॉवे स्वरा,

क्यों ढूंडा चार चफेरा गुरु रब मेरा वसदा हर इक था,

सदके जा मैं वारि जा

गुरु दे द्वारे जावा जो मैं मन विच चवा बिन मंगिया ही पावा,

मन हो जांदा निहाल गुरु तो वारि जावा,

सदके जा मैं वारि जा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।