ओ कीहदा माहि पाई बैठा चोला लाल

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॥ पावन पाठ ॥

आजा बेहने जीतिये नि सुन ले प्रीतिये ने,

वेख सामने बैठा तेरे रज रज करिये दीदार नि,

ओ कीहदा कीहदा माहि पाई बैठा चोला लाल,

दिल न ठगे किना सोहना विच कोई शहद ही होना,

जेहड़ा भी लढ़ लगदा एह्दे हुँदा मालो माल.

ओ कीहदा कीहदा माहि पाई बैठा चोला लाल,

नचदी तपड़ी सब नु दस्दी सइयो ना गल मेरे वसदी,

इश्क़ ओहदे विच चली होजा पौंदी फिरा धमाल,

ओ कीहदा कीहदा माहि पाई बैठा चोला लाल,

वेख वेख न रज दिया अखा दिल दियां गला कीह्नु दसा,

मन मंदिर विच वस् गया मेरे गल हुंदी पुहार,

ओ कीहदा कीहदा माहि पाई बैठा चोला लाल,

ऐसा माहि मिल जाए मैनु दिल दे विच वसा ला जह्नु,

कर्म जीत दे वांगु जोगी हो जा आज निहाल,

ओ कीहदा कीहदा माहि पाई बैठा चोला लाल,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।