थारे हाथां में ओ मइया म्हारे मनड़े री डोर

सौरभ मधुकर
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

थारे हाथां में ओ मइया म्हारे मनड़े री डोर

थारे हाथां में ..

कस के रखियो डोर पकड़के

डोर बड़ी कमजोर

थारे हाथां में ..

थे ही जानो सै के मन की

म्हारी भी कुछ जानो जी

म्हारे मनड़ै पे मइया जी छाले थारो जोड़

थारे हाथां में ..

दुनिया को तो घणो सहारो,

म्हारा सब कुछ थे ही थे

किस विध करा बड़ाई थारी..

किस विध करा बड़ाई,थे तो कालजिये री कोर

थारे हाथां में ..

जीवन री म्हारी नइया मइया थारे भरोसे छोड़ी रे

तेज लहर है,उठ्यो बवंडर,

अन्धकार घनघोर ..

थारे हाथां में..

कलयुग में थारा दरसन करके चोखानी दुःख टल जावे

शरणागत हो भगत निहारे

मइया थारी ओर...

थारे हाथां में ..

थारे हाथां में ओ मइया म्हारे मनड़े री डोर

थारे हाथां में ..

कस के रखियो डोर पकड़के

डोर बड़ी कमजोर

थारे हाथां में ..

संपर्क - +919831258090

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।