मेरा अवगुण भरया शरीर गुरु जी मुझे कैसे तारो गे

संत कबीर
श्री राम भजन गुरुदेव भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मेरा अवगुण भरया शरीर गुरु जी मुझे कैसे तारो गे,

कैसे तारो गे गुरु जी कैसे तारो गे,

मेरा अवगुण भरया शरीर गुरु जी मुझे कैसे तारो गे,

राम नाम मैं रट न सक्या सत्संग भी मैं कर न सक्या,

ऐसी है तकदीर गुरु जी कैसे तारो गे,

मेरा अवगुण भरया शरीर गुरु जी मुझे कैसे तारो गे,

दान पूण मैं कर ना पाया,

ना कोई तीरथ नहा के आया,

पापो की तस्वीर प्रभु की कैसे तारो गे,

मेरा अवगुण भरया शरीर गुरु जी मुझे कैसे तारो गे,

ना कोई पूजा पाठ समाधि जन्म जन्म का हु अपराधी,

मेरी दलिया खीर प्रभु जी कैसे तारो गे,

मेरा अवगुण भरया शरीर गुरु जी मुझे कैसे तारो गे,

गुरु शरण में जो भी आवे,

सोही अमित जीवन फल पावे,

कह गये संत कबीर प्रभु जी कैसे तारो गे,

मेरा अवगुण भरया शरीर गुरु जी मुझे कैसे तारो गे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।