वे रब्बा तनु इक वारि मिलना जरूर है

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

वे रब्बा तनु इक वारि मिलना जरूर है,

यार कॉल बह के तनु तकना जरूर है,

तू है सोहना या सड़ा यार है सोहना,

शक दिल विचो कड़ना जरूर है,

वे रब्बा तनु इक वारि मिलना जरूर है,

तू खबरे किस शहर च वसदा,

घर तेरे दा कोई रस्ता न दसदा,

सजना ने तेरा वारे दसया जरूर है,

तू है सोहना या सड़ा यार है सोहना,

शक दिल विचो कड़ना जरूर है,

वे रब्बा तनु इक वारि मिलना जरूर है,

यार मेरे दी आँख मस्तानी होइ फिरदी दुनिया दीवानी,

अखा तेरिया दे विचो तकना जरूर है,

तू है सोहना या सड़ा यार है सोहना,

शक दिल विचो कड़ना जरूर है,

वे रब्बा तनु इक वारि मिलना जरूर है,

हॉवे गा तू दुनिया ले सोहना यार मेरे जेहा रूप न होना,

दिलदार मेरे दा योगी बखरा सुरु है,

तू है सोहना या सड़ा यार है सोहना,

शक दिल विचो कड़ना जरूर है,

वे रब्बा तनु इक वारि मिलना जरूर है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।