लाइयाँ अखियां जी लाइयाँ अखियां

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॥ पावन पाठ ॥

लाइयाँ अखियां जी लाइयाँ अखियां,

बड़ियाँ ही जग तो छुपाइयाँ अखियां,

सोहने सोहने माहि दा दीदार जदो किता,

सड़े कोलो भी न गइयाँ लुकाइयाँ अँखियाँ,

लाइयाँ अखियां जी लाइयाँ अखियां,

अखियां ने पहला माहि सुपने च तकियाँ,

एहो जेहा तकिया मैनु मार सुतिया,

सोने दिया आखा विच नहियो वेखना केहन्दियाँ सी मैनु मेरी अँखियाँ,

सोहने सोहने माहि दा दीदार जदो किता,

सड़े कोलो भी न गइयाँ लुकाइयाँ अँखियाँ,

लाइयाँ अखियां जी लाइयाँ अखियां,

अखा अखा विच माहि गला समझा इया ने,

कॉल साहनु रख के एशा भी करवाइए ने,

नच नच माहि न मैं फिर तो मनावा गी,

झांजरा भी मैं साम्ब साम्ब राखियां,

सोहने सोहने माहि दा दीदार जदो किता,

सड़े कोलो भी न गइयाँ लुकाइयाँ अँखियाँ,

लाइयाँ अखियां जी लाइयाँ अखियां,

दिल दिया सद्र न पूरियां करवाओ जी,

सादे होके साहनु तू अपना बनावो जी,

तूद्दे बिना पूछियां ना किसे ने आके,

सोहने सोहने माहि दा दीदार जदो किता,

सड़े कोलो भी न गइयाँ लुकाइयाँ अँखियाँ,

लाइयाँ अखियां जी लाइयाँ अखियां,

किस देश जावे योगी दुखड़े सुनावे जी,

दिल वाले जखमा नु किस नु दिखावे जी,

ठंढियां हवावा दी की आस रखिये,

तुहाडे वंगु चल दा न कोई पखियाँ,

सोहने सोहने माहि दा दीदार जदो किता,

सड़े कोलो भी न गइयाँ लुकाइयाँ अँखियाँ,

लाइयाँ अखियां जी लाइयाँ अखियां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।