बात ये गले से उतर ती नही

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॥ पावन पाठ ॥

झुंझुन में बिगड़ी सवर ती नहीं,

बात ये गले से उतर ती नहीं,

दर पे यो इसके सुनाई न होती,

बिगड़ी जो इसने बनाई होती,

चौकठ पे दुनिया पसर ती नहीं,

बात ये गळे से उतर ती नहीं,

लाखो का जीवन सवारा न होता,

फ़ोकट में पूजना गवारा न होता,

पत्थर पे यु ही चांदी जड़ ती नहीं,

बात ये गले से ुटर ती नहीं,

झुंझुनू में आनदं अगर न बरसता,

वनवारी जाने को दिल न तरस ता,

मूरति पे चुनड़ी यही चढ़ती नहीं,

बात ये गले से उतर ती ही,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।