ईगो इक नशा है

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॥ पावन पाठ ॥

ईगो इक नशा है इसे छोड़ कर देखो,

जीवन को थोड़ा सा मोड़ कर देखो,

ईगो की बजा से है सारे विबाद,

ईगो की बजा से है ढंगे फसाद,

ईगो की वजा से बिगड़ ती है बात ईगो की बजा है से ही होते तलाक,

ईगो तो है लाठी इसे तोड़ कर फेको,

जीवन को थोड़ा सा मोड़ कर देखो,

किसी को झुकना है तो झुकना पड़े,

रोकना है किसी को तो रुकना पड़े,

समझोते का अवसर निकलने लगा,

ऐसा न हो के आगे जाके टूटना पड़े,

दूरिया घटे गी हाथ जोग कर देखो.

जीवन को थोड़ा सा मोड़ कर देखो....

छोड़ो गे तो रास्ता तो रस्ते खुले,

खुशियों के द्वार तेरे वास्ते खुले,

वधा बनाओ गे तो वाधा मिले गी,

मोहन बनो गे तो राधे मिले गी,

राधे मोहन जैसा रिश्ता जोड़ कर देखो,

जीवन को थोड़ा सा मोड़ कर देखो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।