भगत पुकारे आज मावड़ी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन रानी सती दादी भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भगत पुकारे आज मावड़ी आके लाज बचा जा रे,

दुःख पावे है टाबर थारा आके कष्ट मिटा जा रे,

सिर पे हमारे गम के बादल जब जब भी मडराते है,

और न कुछ भी भावे दादी थारी याद सतावे है,

सुनले माहरी अर्जी दादी मन की बात बतावा एक,

भगत पुकारे आज मावड़ी आके लाज बचा जा रे,

कर सोलह शृंगार भवानी म्हारे घरा जब आवो गा,

तन मन धन सब वार दिया जो जीवन अब वारा गा,

ढग मग ढोले नैया हमारी भव से पार लगा जा रे,

भगत पुकारे आज मावड़ी आके लाज बचा जा रे,

झुंझुन की धरती है पावन माटी तिलक लगवा जी,

दीं दुखी दरवाजे आवे हर संकट कट जावे जी,

आकाश परिचय युक युक दादी थारा दर्शन पावा है

भगत पुकारे आज मावड़ी आके लाज बचा जा रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।