योगी बेश धर के नंदी पे चढ़ के

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

योगी बेश धर के नंदी पे चढ़ के,

गोरा को विहाने भोले नाथ आ गये है,

देख देख दुहला और बराती राजा हिमाचल में न गबरा रहे है,

योगी बेश धर के नंदी पे चढ़ के,

देख कर के दूल्हा सखियाँ गबरा गई है,

दौड़ी दौड़ी गोरा के पास आ गई है,

बोली सखियाँ जा कर दूल्हा सो वर्ष का,

मुँह से बाहर उसके दांत आ रहे है,

योगी बेश धर के नंदी पे चढ़ के,

माथे पे चंदा जटा में है गंगा,

बसम रामये भोला मस्त मलंगा,

भूत प्रेत सारे ढोलक भजाये,

शुक्र शनिशर नाच गा रहे है,

योगी बेश धर के नंदी पे चढ़ के,

हाथ जोड़ कर के भोली गोरा प्यारी,

रूप दिखाओ असली भोले भंडारी,

सत्ररा वश के बने भोले बाबा,

लोहियां कहे ये मेरे मन भा गये है,

योगी बेश धर के नंदी पे चढ़ के,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।