नारायणी को जवाब नहीं

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन रानी सती दादी भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

पहला पुजाइयो झुंझुनू जी पाछे पुजायो देव सर जी,

बाद में ढोकवा धाम नारायणी को जवाब नहीं,

सबसे पहला सांसरिये की घर घर ज्योत जगाई,

पाछे मूल स्थान पे दादी जी पुजवाई,

बाद में पीहरिये में आई ढोकवा धाम की शान बड़ाई,

झुक झुक करा परनाम नारायणी को जवाब नहीं

योगन सुहगन ससरिया को जग में मान बढ़ावे,

वीके पेहरिये में सुन लो दुःख कदे न आवे,

दादी जी की राह पे चलो जी,

जो कहे दादी वही करो जी,

होव गो निज कल्याण दादी को जवाब नहीं,

झुंझुनू देवसर ढोकवा दादी ने लागे प्यारो,

.जो भी करे तीनो का दर्शन हॉवे वारो न्यारो,

भक्ति मिलेगी शक्ति मिले गी,

नाम जपो गे तो शक्ति मिले गी,

गावे है महिमा श्याम नारायणी को जवाब नहीं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।