ये दुनिया सारी नशवर है

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

ये दुनिया ये दुनिया,

ये दुनिया सारी नशवर है यहाँ से सबको जाना है,

रिश्ते नाते सब छूटे इक साई नाम सुहाना है,

ये दुनिया सारी नशवर है यहाँ से सबको जाना है,

क्यों देख देख के दर्पण में क्यों इतना इतराये तू,

राग बने गई इक दिन काया चाहे लाख सवारे तू,

जो आया है वो जाएगा पल भर का नहीं ठिकाना,

ये दुनिया सारी नशवर है यहाँ से सबको जाना है,

ये दौलत ये शानो शोकथ सब मिट जायेगी इक पल में,

तू करले कर्म तू करले भरम बस यही रहे गा इस जग में,

जो बोये गा वही पायेगा यही दस्तूर पुराना है,

ये दुनिया सारी नशवर है यहाँ से सबको जाना है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।