सुबह साँझ की वेला है सुख दुःख की कहानी है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सुबह साँझ की वेला है सुख दुःख की कहानी है,

ज़िंदगी ये तो कुछ भी नहीं ये तो आणि जानी है,

सुबह साँझ की बेला है...

माया ने मारा है ममता ने वसाया है,

तृष्णा की डगर पर तो कर्मो ने गेरा है,

बंधन को हटा कर के हमे मुकति पानी है,

ज़िंदगी ये तो कुछ भी नहीं ये तो आणि जानी है....

कई ठोकरे खानी है फिर भी न संभाला है,

प्यार के चकर में कई गोहते लगाए है,

इस भवर से छूठन को सत्पथ को तो पाना है,

ज़िंदगी ये तो कुछ भी नहीं ये तो आणि जानी है,

कुछ राग में खोना है,

कुछ देश में खोना है,

ऋषियों को आंधी में सब कुछ ही गवाया है,

अज्ञान हटा कर के इक ज्योति जगानी है,

ज़िंदगी ये तो कुछ भी नहीं ये तो आणि जानी है,

जीवन के मदरे जो सत्कर्म कमाओ,

बस मरने से पहले भी कुछ कर्म कमा जाऊ,

कहते है वेद सभी हर चीज अभिमानी है,

ज़िंदगी ये तो कुछ भी नहीं ये तो आणि जानी है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।