सिर पर मेरे है सदा मात पिता का हाथ

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॥ पावन पाठ ॥

मैं खुश किस्मत हु कितना माँ बाप है मेरे साथ,

सिर पर मेरे है सदा मात पिता का हाथ,

मैं खुश किस्मत हु कितना माँ बाप है मेरे साथ,

मंदिर मंदिर जा कर के भगवान से और मैं क्या मांगू,

यही मात पिता मिले जन्म जन्म भगवान से बस मैं ये मांगू,

यही करते रहे जीवन में मेरे किरपा की बरसात,

सिर पर है मेरे सदा मात पिता का हाथ,

कोठी बंगला घोडा गाड़ी सोना चांदी मिल जायगे,

चाहे खर्च करो सारी दौलत माँ बाप न मिलने पाएंगे,

मैं मात पिता की सेवा करता जाओ दिन रात,

सिर पर है मेरे सदा मात पिता का हाथ,

ऊँगली पकड़ के मेरी तो मुझको चलना सिखलाया है,

मेरे मात पिता ने जीवन का हर भेद मुझे बतलाया है,

सिर पर है मेरे सदा मात पिता का हाथ,

किया जीवन में उज्याला,

काटी दुखो की रात,

सिर पर है मेरे सदा मात पिता का हाथ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।