मन रे तू काहे ना धीर धरे

मोहम्मद रफ़ी
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॥ पावन पाठ ॥

मन रे ! तू काहे ना धीर धरे

वो निर्मोही मोह ना जाने जिनका मोह करे

मन रे ! तू काहे ना धीर धरे

इस जीवन की चढ़ती ढलती धुप को किसने बाँधा

रंग पे किसने पहरे डाले रूप को किसने बाँधा

काहे ये जतन करे

मन रे ! तू काहे ना धीर धरे

उतना ही उपकार समझ कोई जितना साथ निभा दे

जनम मरण का मेल है सपना

ये सपना बिसरा दे

कोई ना संग मरे

मन रे ! तू काहे ना धीर धरे

मन रे ! तू काहे ना धीर धरे

वो निर्मोही मोह ना जाने जिनका मोह करे

मन रे ! तू काहे ना धीर धरे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।