द्वारिका नाथ इतने दयालु

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

द्वारिका नाथ इतने दयालु दीं दुखियो को दिल से लगाते,

भगतो के दुःख को पल में मिटाने धरती पर जनम लेकर आते,

द्रोपदी जब यहा की बिलख ती,

उसकी लजा भी जब दांव पर लगती,

सच्चे मन से पुकारे लगाती वसतर देके है उसे बचाते,

द्वारिका नाथ इतने दयालु दीं दुखियो को दिल से लगाते,

दुर्योध्न ने प्रभु को भुलाया मेवा मिष्ठान,

स्वागत में लाया पर अभिमान से दूर भगवान सज के विधुर घर आते,

द्वारिका नाथ इतने दयालु दीं दुखियो को दिल से लगाते,

मोह में अँधा था जैसे अर्जुन रूप उसको विराट दिखाते,

जो भगवान के है भरोसे हारता नहीं वो प्रभु जिताते,

द्वारिका नाथ इतने दयालु दीं दुखियो को दिल से लगाते,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।