तेरे नाम की चादर उड़ उड़

विनोद अग्रवाल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे नाम दी चादर ओढ़ ओढ़,

सारी दुनिया को छोड़ छोड़,

वो तो प्रीत की डोरी जोड़ जोड़,

तेरी प्रेम दीवानी हो गई,

जोबन मस्तानी हो गई,

ये कैसी खुमारी है छाई,

ये कैसा आनंद है आया,

प्यारे के रूप को देख देख,

मेरा रोम रोम है हरषाया,

बांके के बांके नैन नैन ,

अधरों के मीठे बेन बेन,

अब पड़े न मुझको चैन चैन,

मैं सुध भूध अपनी खो गई,

जोगन मस्तानी हो गई.........

तेरा मेरा मेरा तेरा,

संयोग ये कैसा हो गया,

थारी सखियाँ पूछे मुझसे,

ये रोग ये कैसा हो गया,

मोहन मेरे दिलदार यार,

हुई अँखियाँ जब से चार चार,

लेके दिल में तेरा प्यार प्यार,

मैं गहरी नींद में सो गई,

जोगन मस्तानी हो गई.........

अब तुमसे है नाता मेरा,

अब जग से ना कुछ काम है,

आँखों में तेरा रूप वसे,

होठो पे तेरा नाम है,

तेरी याद में बहते नीर नीर,

मनवा में उठती पीढ पीढ,

अब कैसे धारु धीर धीर,

तेरे प्यार में पागल हो गई......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।