बिना प्रेम धीरज नहीं

के जे येसुदास
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॥ पावन पाठ ॥

बिना प्रेम धीरज नहीं,

बिरह बिना बैराग..

सतगुरु बिना ना छुटिहै, मन मनसा की दाग

बिना प्रेम धीरज नहीं ..

नैना नीर भर नाइ आँख

रहत बसे निस जाम

पपीहा ज्यूँ पीहू पीहू करे ...

कब मिल होंगे त्राण.. त्राण..त्राण

बिना प्रेम धीरज नहीं ..

आई ना सकु तुझपे

सकु ना तुझ बुलाई

जियरा युही लैहु उड़ी..

बिरह तपाई ..तपाई ..तपाई..

बिना प्रेम धीरज नहीं ..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।