मेरे दुःख के दिनों में वो बड़े काम आते है

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे दुःख के दिनों में वो बड़े काम आते है,

साई मेरी पीड़ा पहचान जाते है,

मेरे दुःख के दिनों में वो बड़े काम आते है,

मैं जब भी भुलाता हु साई दौड़े आते है,

मझधार मेरी नैया साई पार लगाते है,

मेरे आंसू पौंछ ते है और मुझे हसाते है,

मेरे दुःख के दिनों में वो बड़े काम आते है,

ये बड़े किरपालु है दुःख पल में हरते है,

अपने भक्तो की ये ईशा पुराण करते है,

दुखियो के दुखो को ये तो जान जाते है,

ये इतने दयालु हर किसी को प्यार करे,

जो आये समाधि पर उसका उधार करे,

ये भगतो का कहना तो मान जाते है,

मेरे दुःख के दिनों में वो बड़े काम आते है,

जग का तू बाबा इक ही आधार है,

इस जीवन में मेरे साई तेरा उपकार है,

जो भी दर पे आये,झोली भर के जाते है,

मेरे दुःख के दिनों में वो बड़े काम आते है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।