तेरा भोले से गोरा विवहा हो गया

पारंपरिक
महादेव आरती शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

किया तप इस कदर हुआ शिव पे असर,

तेरा भोले से गोरा विवहा हो गया,

शुभ घडी आ गई फिर ख़ुशी आ गई,

रूप शिव जी का तेरे तो मन भा गया,

किया तप इस कदर हुआ शिव पे असर

क्या वो बारात थी नाथो के नाथ की,

शिव से मिलने को गोरा भी बेताब थी,

आरती के दिए फूल माला लिए,

शिव के स्वागत में सारा नगर आ गया,

देव घन झूमते भूत भी नाचते,

इनकी हुंकार सुनते सभी कांपते,

भोले लीला करे सखियाँ सारे डरे,

देखा गोरा ने मन उनका चकरा गया,

गोरा सोचे मेरा तो शंकर नहीं,

आँखे खोली तो शिव जैसा सूंदर नहीं,

देखि सूंदर छवि करते अचरच सभी,

ये चमत्कार कैसा गज़ब ढा गया,

खुश हिमाचल हुए माँ ने तोफे दिये

गोरा त्यार थी अब विदा के लिए,

छूटा बाबुल का घर चली शिव के लग्न,

शिव की लीला सुनी तो मगन हो गया,

किया तप इस कदर हुआ शिव पे असर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।