चुनरी बनायी मैया पाई पाई जोड़ के

सौरभ मधुकर
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॥ पावन पाठ ॥

चुनरी बनायी मैया पाई पाई जोड़ के

राख लीजे मान म्हारी चुनरी ने ओढ़ के

चुनरी बनायी मैया पाई पाई जोड़ के

धन धन भाग थाने चुनरी उढ़ावा माँ

सोड़ी सोड़ी चुनरी ने हाथां से जचावा माँ

जचे ना सिंगार थारो चुनरी ने छोड़ के

चुनरी बनायी मैया पाई पाई जोड़ के

चुनरी बनायी मैया पाई पाई जोड़ के

राख लीजे मान म्हारी चुनरी ने ओढ़ के

चुनरी बनायी मैया पाई पाई जोड़ के

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।