सझ रहे मेरे भोले नाथ दुलहा बन के

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सझ रहे मेरे भोले नाथ दुलहा बन के,

सझ रहे मेरे भोले नाथ लाडा बन के,

दूल्हा वो बन के लाडा वो बन के,

सझ रहे मेरे भोले नाथ दुलहा बन के,

रूप विरला पिया विश का प्याला,

तन भस्म रमाये वो अलख रमाये,

गल सर्प की माला पिए भंग का प्याला,

तन मिरग की शाळा बाबा डमरू वाला,

जता में धारी गंगा मस्तक पे चंदा,

हाथ तिरसूल धारे गोरा के प्यारे,

संग शंकर और शनिशर झूमे बाराम बार,

देखो अज़ब शिव भोले है नन्दी पे सवार,

सझ रहे मेरे भोले नाथ दुलहा बन के,

पर्वत पे अकेले,

तप करते भोले देवो के देवा ये है महादेवा,

कैलाश पे डेरा भूतो का गेरा नहीं किसी के वस् में,

सब इनके वस् में जग के है स्वामी शिव भोले दानी,

मस्ती में आके सब ढोल भजाते,

पी के भंग भूति सब नाचे गाये,

कोई हटा कटा कोई इक दम बच्चा,

कोई बिना सिर वाला कोई कई सिर वाला,

कोई इतना लम्बा कोई तन का खम्बा,

कोई बिलकुल चंगा कोई बिलकुल नंगा,

कोई इक दम छोरा कोई बहुत ही गोरा,

कोई मुँह बनावे कोई मुँह चिड़ावे,

आपस में लड़ते गिरते और बढ़ते,

भूतो की टोली करे हसी ठिठोली,

शिव शम्भू बोले जय बम बम बोले,

बारात तो पौंछी हिमाचल के द्वारे,

मस्ती में सारे बारात को देखे,

सारे नर नारी,

सब दर के भागे कोई भागे आगे कोई भागे पिछाड़ी,

सब की खुल गई धोती और साडी है अज़ाब बाराती भोले के साथी,

भूतो और चुडलो की जब पौंछी बारात देखा जो भी माँ जलवे तो लगा आधार,

सझ रहे मेरे भोले नाथ दुलहा बन के,

मेरे भोले दानी की अनोखी सौगात,

भूत और चुडलो की चली रे बरात,

सझ रहे मेरे भोले नाथ दुलहा बन के,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।