चलो मन जाए घर अपने

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॥ पावन पाठ ॥

चलो मन जाए घर अपने

इस परदेस में..ओ परदेस में ..

क्यूँ परदेसी रहे.. हे...

चलो मन जाए घर अपने ..

आँख जो भाये वो कोरा सपना

सारे पराये है, कोई ना अपना

ऐसे झूठे प्रेम में पड़ ना ..

भूल में काहे जिए..हे..

चलो मन जाए घर अपने

सच्चे प्रेम की ज्योत जला के

मन सुन मेरी कान लगा के

पाप और पुण्य की गठरी उठा के

अपनी राह चल ...हे...

चलो मन जाए घर अपने

चलो मन जाए घर अपने

इस परदेस में..ओ परदेस में ..

क्यूँ परदेसी रहे.. हे...

चलो मन जाए घर अपने ..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।