मंगलमय त्यौहार आया जय हो अम्बे मात की

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नवतारी त्यौहार आया जय हो अम्बे मात की

मंगलमय त्यौहार आया जय हो अम्बे मात की,

जग में बहार लाया जय अम्बे मात की,

जय हो अम्बे मात की जय दुर्गा मात की,

मंगलमय त्यौहार आया जय हो अम्बे मात की

नवतारी त्यौहार आया जय हो अम्बे मात की

जय हो अम्बे मात की जय दुर्गा मात की,

शक्ति सवरूप आई मेरी अम्बे मात जी,

दुष्टो से बचाने आई मेरी दुर्गा मात की,

मंगलमय त्यौहार आया जय हो अम्बे मात की

भगतो की पालक है मेरी अम्बे मात जी,

शेरो पे सवार आई शेरो वाली मात जी,

कनक खप्पर धारी मेरी अम्बेमात जी,

रोदर सवरूपा माँ दुष्टो की काल जी,

नवराति तोहार आया जय अम्बे मात की,

अनदन से बोलो जय महा काली मात की,

महा काली मात की जय महा गोरी मात की,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।