दीवानी मैं दीवानी

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॥ पावन पाठ ॥

मुक्तसर है ये मेरी कहानी साईं बाबा की हुई मैं दीवानी,

दीवानी मैं दीवानी,

उसका मुखड़ा है मेरा दर्पण,

उसका सदका है मेरा जीवन,

वो है दाता तो मैं भिखारन,

वो है पूजा तो मैं पुजारन,

मुक्तसर है ये मेरी कहानी साईं बाबा की हुई मैं दीवानी,

मेरे जीवन का तू खिवाइया,

ढुभ जाए ना मेरी नैया सबकी पूरी हो ताबीरे,

पड़ ले साईं मेरी तहरीरे,

मुक्तसर है ये मेरी कहानी साईं बाबा की हुई मैं दीवानी,

अल्लह मालिक कहे अल्लाह हु ,

क्या किस दिल में जानता है तू,

सबकी पहचान तू बाताता है हर किसी को गले लगता है,

मुक्तसर है ये मेरी कहानी साईं बाबा की हुई मैं दीवानी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।