जगराते की रात आई ज्योत जगाये गे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जगराते की रात आई ज्योत जगाये गे,

शेरोवाली के हम दर्शन पाएंगे,

जगराते की रात आई ज्योत जगाये गे,

नो राता आया माँ का धयान लगये गे,

माँ आंबे शेरोवाली का गुण गान गायेगे,

चरणों में माँ का जयकारा लगाए गे,

जगराते की रात आई ज्योत जगाये गे,

लाल चुनरिया अम्बे की मिल के सजाये गे,

नाच नाच के मैया को हम तो रिजाये गे,

शीश को निभा के हम दर्शन पाएंगे,

जगराते की रात आई ज्योत जगाये गे,

कंजक रूप में दुर्गा जी घर मेरे आएगी,

मेरे सारे बिगड़े काम अम्बे बनाये गई,

हलवा चने का हम भोग लगाए गे,

जगराते की रात आई ज्योत जगाये गे,

व्रत नो दिन माँ का भगतो आया है,

घर घर खुशियों की ये सौगात लाया है,

मन के मंदिर में मैया को वसाये गे,

जगराते की रात आई ज्योत जगाये गे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।