आज सोमवार है शिव शंकर का वार है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आज सोमवार है शिव शंकर का वार है,

ये सच्चा दरबार है श्रद्धा से जल जो भी चढ़ाये उसका वेडा पार है,

सोमवार को शिवमंदिर में भक्त कोई जो जाते है,

पाप ताप से मुक्ति पाते भाव सागर तर जाते है,

महिमा अप्रम पार है शिव शंकर ला वार है,

श्रद्धा से जल जो भी चढ़ाये उसका वेडा पार है,

सोलह सोमवार जो कन्या शिव का पूजन करती है,

मन चाहा इषुक वर वो शिव की किरपा से पाती है,

किरपा का भंगार है शिव शंकर का वार है,

श्रद्धा से जल जो भी चढ़ाये उसका वेडा पार है,

कानो के विशु के कुण्डल गल सर्पो की माला की,

तन पे विभूति माथे चंदा और पहनी मृगशाला है,

तुम्हारी जय जय कार है शिव शंकर का वार है

श्रद्धा से जल जो भी चढ़ाये उसका वेडा पार है,

भ्र्म जी को वेद दिए लंका रावण दे डाली है,

तीनो लोक में तुमसे बढ़कर दूजा कोई न दानी है,

नमन करे संसार है शिव शंकर का वार है,

श्रद्धा से जल जो भी चढ़ाये उसका वेडा पार है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।