बाबा तुम्हारे दर आये हम बन के तुम्हरे सवाली

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॥ पावन पाठ ॥

बाबा तुम्हारे दर आये हम बन के तुम्हरे सवाली,

संकट दूर हो पल में हमारे तुमने नजर जो ढाली ,

साई बाबा साई बाबा,

तुम अन्तरयामी हो साई सब जानो बिन बतलाये,

तुम से कैसे कोई साई अपना राज छुपाये,

दया दृष्टि जिसपे हो इक बार तुम्हारी साई,

उसके जीवन में खुशिया लाखो तुमने भर डाली,

साई बाबा साई बाबा,

बाबा तुम्हारे दर आये हम बन के तुम्हरे सवाली,

दूर दूर से लोग आते है दर्शन को तुम्हारे,

ध्यान लगा कर सारे बस साई का नाम पुकारे,

जो मोई उम्मीद लिए आता है तेरे द्वारे,

साई तुमने उसकी आशा सब पूरी कर डाले,

साई बाबा साई बाबा,

बाबा तुम्हारे दर आये हम बन के तुम्हरे सवाली,

दामन फैलाया है साई मैंने तुम्हारे आगे,

रब जाने तकदीर मेरी अब जागे या न जागे,

इतनी है उम्मीद मुझे मायूस न होने दोगे,

साई पल में भर ढालो गे मेरी झोली खाली,

साई बाबा साई बाबा,

बाबा तुम्हारे दर आये हम बन के तुम्हरे सवाली,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।