कंजकां नाल झूला झूले माँ मैं बलिहारी जावां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कंजकां नाल झूला झूले माँ, मैं बलिहारी जावां

भगतां नु आवे ठंडी छा मैं बलिहारी जावां

झूले ते बैठी मैया खिड़ खिड़ हस्दी

मिठ्ठीआ गल्ला दाती सब नु दसदी

मुख माँ दा तकदा रहा, मैं बलिहारी जावा

कंजकां नाल झूला झूले माँ, मैं बलिहारी जावां...

विच अम्बर दे माँ पींग चढ़ावे,

देवते माँ नु सीस झुकाव

कदमा विच सजदे करा, मैं बलिहारी जावा

कंजकां नाल झूला झूले माँ, मैं बलिहारी जावां...

चलदीआ ठंडिआ मस्त हवावा

राज राज माँ दे दर्शन पावां

चरना च दिति माँ ने थां, मैं बलिहारी जावा

कंजकां नाल झूला झूले माँ, मैं बलिहारी जावां...

शौंकी माँ दीआं भेंटा गावे,

लख लाख माँ दा शुक्र मानावे

सब तो है प्यारा माँ दा ना, मैं बलिहारी जावा

कंजकां नाल झूला झूले माँ, मैं बलिहारी जावां...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।