रूखी सुखी खाई जप लिया साई

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॥ पावन पाठ ॥

रूखी सुखी खाई जप लिया साई,

भगता ने इसी तरह उम्र बिताई,

रूखी सुखी खाई जप लिया साई

रोंदेया दिला न मेरा साई हसाये गा,

तपदे कलेजिया च ठण्ड साई पाएगा,

दिल विच साई तेरी सूरत वसाई,

भगता ने इसी तरह उम्र बिताई,

रूखी सुखी खाई जप लिया साई

नशा साहनु साई तेरे नाम वाला होया है,

दिल सदा साई तेरी गलियां च खोया है,

साई नाल यारी सारी उम्र निभाई,

भगता ने इसी तरह उम्र बिताई,

रूखी सुखी खाई जप लिया साई

साई दे दीवाने सदा मस्ती च रेह्न्दे ने,

दिल वाली गला सारि साई जी न कहन्दे ने,

साई चरना दी धूलि मथे ऊठे लाइ,

भगता ने इसी तरह उम्र बिताई,

रूखी सुखी खाई जप लिया साई

इक इक पल तेरी याद च गुजरिया,

साहनु साई तेरे विशोडिया ने मारया.

छड़ के तू साहनु साई कड़े भी न जाए,

भगता ने इसी तरह उम्र बिताई,

रूखी सुखी खाई जप लिया साई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।