नित खावां पीवां मौज करा

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॥ पावन पाठ ॥

नित खावां पीवां मौज करा नित ख़ुशी मनावा,

जद साई मेरा नाल मेरे मैं क्यों गबरावा,

मैनु इक भरोसा साई ते विश्वाश है पका साई ते सबनु समजावा,

जद साई मेरा नाल मेरे मैं क्यों गबरावा,

एह कमली आखे जग मैनु मैनु फर्क न पेंदा कोई,

तन साई दा मन साई दा जिन्द्जान भी उसदी होइ,

कोई चिंता नहीं हूँ दुनिया दी,

साई मेरा मैं साई दी हर वेले शुक्र मनावा,

जद साई मेरा नाल मेरे मैं क्यों गबरावा,

जे साई दा पल्ला फ़दया मैं फ़िक्र करा क्यों कोई,

आप भर जांदे गम सारे सब करे करावे ओहि,

सत जाने सतगुरु साईवे करता हर दम सुनवाई वे,

कुज भी न लुकावा,

जद साई मेरा नाल मेरे मैं क्यों गबरावा,

ओह देवे ता यतीमा न मुखड़ा न शाह बनावे,

ओहदे हाथे डोरी सब दी जीवे ओ चावे नचावे,

मैं कट पुतली है साई दी साई दे गुण गावे,

जद साई मेरा नाल मेरे मैं क्यों गबरावा,

साहिल उपकार बड़ा उसदा सेवा विच अपनी लाया,

वडाई वे उस दाता दी मंदिया नु भी अपनाया,

सबने ते मेहर लुटावे ओ सबने ते कर्म कमावै ओ,

जद साई मेरा नाल मेरे मैं क्यों गबरावा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।