होवे फुल्लां दी वरखा मन्दिर ते

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

फुल्लां दे नाल सजिया देखो रानी माँ दा मंदिर

खिड़ खिड़ कर के हस्दी दाती सज्ज के बैठी अंदर

चरना दे विच्च झुक गए आके अकबर जहे सिकंदर

भंगड़े पाउँदै भगत मैया दे सब बन गए मस्त कलंदर

माँ खुश है मस्त कलंदरां ते,

होवे फुल्लां दी वरखा मन्दिर ते

साजिया फुल्लां दे नाल माँ दा दरबार है

शेर ते बैठी देखो सच्ची सरकार है

झंडे झूल रहे अम्बरां ते,

होवे फुल्लां दी वरखा मन्दिराँ ते

नच्दे भगत पा के गाल विच्च मौलिया

सब दिया भरी जांदी माँ मेरी झलिआ

अज्ज लगीआ कतार देखो लंगड़ा ते

होवे फुल्लां दी वरखा मन्दिराँ ते

सोहने दरबार उत्ते अकबर आया सी

छतर चढ़ा के फिर सर नु झुकाया सी

माँ दा चले हुकम सिकंदरा ते

होवे फुल्लां दी वरखा मन्दिराँ ते

‘शोंकी’ केंदा मैया जी दी होई करामात है

खुशीआ दी कर दित्ती माँ ने बरसात है

माँ करे गुलजार बंजराँ ते

होवे फुल्लां दी वरखा मन्दिराँ ते

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।