इनके रेहमत का आसर है

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॥ पावन पाठ ॥

साईं सुनता दिल की बातें,पूरी करता अर्जु,

इनके रेहमत का आसर है आज मैं जो कुछ भी हु,

माझी बनता साई बाबा नाव जब मझदार हो,

कैसे डूबे उनकी नैया साई जब आधार हो,

पार है मुझको लगाया मैं सदा सुमिरन करू,

इनकी रेहमत का असर आज मैं जो कुछ भी हु,

लाख चौरासी के फंदे साई पल में काट ता,

हो यहाँ नफरत दिलो में ये महोबत बाँट ता,

ये लुटाता सब पे खुशियां मैं ही तो झोली भरु,

इनकी रेहमत का असर है आज मैं जो कुछ बी हु,

इक ही सन्देश इनका सब का मालिक एक है,

वो ही पाते इनकी चौकठ जिनकी नीयत नेक है ,

सोनी जब साई भरोसे फिर जगत से क्यों डरु,

साईं सुनता दिल की बातें .......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।