दाना पानी खींच के ले आंदा कौन किसे दा खांडा

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॥ पावन पाठ ॥

दाना पानी खींच के ले आंदा कौन किसे दा खांडा,

कहनु करदा झड़े चैड़े न वस् तेरे न वस् मेरे गुनाह वस् मेरे,

आपस दे विच वंद के खा लो नाल न को ले जांदा,

दाना पानी खींच के ले आंदा कौन किसे दा खांडा,

किथों चल्या किथे रलया तू क्यों सोचा सोचे बलैया,

मोहर है दाने दाने उते दान नाल ले आंदा,

दाना पानी खींच के ले आंदा कौन किसे दा खांडा,

तू रख डोरी रब ते मित्रा काह्नु होना है बेशुकरा,

तू जग अंदर पीछो आवे ओ पहले लिख जंदा

दाना पानी खींच के ले आंदा कौन किसे दा खांडा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।