गोपी के विरह में

मनोहर महाराज तालबेहट
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नश्याम तुम्हारे विरह में ,

नही चैन जरा पाते है

तुम आये नही मन मोहन,

हमे वादे वो तड़पाते है

वादा भूल गए हमे छोड़ गए,

क्यों आप मेरा दिल तोड़ गए

कैसे हो कहा है माधव,

संदेश नही आते है

सूख गया नयनो का पानी,घाट हुई मैने ना जानी

प्रीत लगा पल पल पछतानी,किस को सुनाये हम प्रेम कहानी

घट घट सूना है तुम्हारे बिना, याद सपनो में आते हो

सूने पनघट श्याम पड़े है,यमुना तट वीरान पड़े है

ज्यो चंदा बिन रेन विहूनी,विन पानी ज्यो सरिता सुनी

यादो के सहारे मनोहर दिन रात बिताते है

वादा भूल गए हमे छोड़ गए---------

लेखक- मनोहर महाराज तालबेहट

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।