फर्याद लौट आई मेरी आसमा पे जा के

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

फर्याद लौट आई मेरी आसमा पे जा के,

क्या मिला तुझे बता दे इस दास को रुला के,

फर्याद लौट आई मेरी आसमा पे जा के,

मैं रोया ज़िंदगी भर फिर भी न बदली किस्मत,

माँगा था इक सहारा बक्शी है तूने जिलत,

तू बैठा मुस्कुराये मेरा ये दिल जला के,

फर्याद लौट आई मेरी आसमा पे जा के,

लगता है डोर जग की तेरे हाथ में नहीं है,

दातार जैसे तुझमे कोई बात ही नहीं है,

देदे मुझे मेरा हक़ बैठा है क्यों दबा के,

फर्याद लौट आई मेरी आसमा पे जा के....

अब तक मिला है किसको जो मुझे भी अब मिले गा,

बैठा है कब से छुप के कब तक यही छुपे गा,

आराम लूट ता है दीनो का दिल जला के,

फर्याद लौट आई मेरी आसमा पे जा के,

अब उठ गया भरोसा जो किया था मैंने तुजपे,

गम राम सिंह कितने बाकि पड़े गए सहने,

हैरान खुद विदायता किस्मत मेरी बना कर,

फर्याद लौट आई मेरी आसमा पे जा के,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।