कन्हैया उतना रोया रोया है सुदामा के लिए

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जितना राधे रोइ रोइ कान्हा के लिए,

कन्हैया उतना रोया रोया है सुदामा के लिए,

यार की हालत देखि उसकी हालत पे रोया,

यार के आगे अपनी शानो शौख़त पे रोया,

ऐसा तड़पा तड़प शमा परवाना के लिए,

कन्हैया उतना रोया रोया है सुदामा के लिए,

यार को लगा कलेजे बात बर बर के रोया,

और अपने बचपन को याद कर कर के रोया,

ये ऋण या अनमोल के श्याम दीवाना के लिए,

कन्हैया उतना रोया रोया है सुदामा के लिए,

पाँव के छाले देखे तो दुःख के मारे रोया,

पाँव धोने की खातिर ख़ुशी के मारे रोया,

आंसू थे भरपाई बस हर्जाना के लिए,

कन्हैया उतना रोया रोया है सुदामा के लिए,

उसके आने से रोया उसके जाने से रोया,

धोके धज धज चावल के दाने दाने पे रोया,

वनवारी वो रोया बस याराना के लिए,

कन्हैया उतना रोया रोया है सुदामा के लिए,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।