बाबा कुण्डलपुर वाले की भक्ति करो झूम झूम के

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

बाबा कुण्डलपुर वाले की भक्ति करो झूम झूम के

झूम झूम के, घूम घूम के,

घूम घूम के, झूम झूम के

विद्यासागर छोटे बाबा की भक्ति करो झूम झूम के

बाबा कुण्डलपुर वाले की...

कुण्डलपुर की सुन्दर पहड़िया

पहड़िया पे है सुन्दर अटरिया

झूम झूम के, घूम घूम के,

जहा विराजे बड़े बाबा, भक्ति करो झूम झूम के

बाबा कुण्डलपुर वाले की...

नए मंदिर में हुआ रे कमाल है

बड़े बाबा की मूरत विशाल है

झूम झूम के, घूम घूम के,

मंदिर विराजे बड़े बाबा की भक्ति करो झूम झूम के

बाबा कुण्डलपुर वाले की...

विद्यासागर जी का यह सपना

सपना देखो हो गया अपना

झूम झूम के घूम घूम के

से उठ गए बाबा, भक्ति करो झूम झूम के

बाबा कुण्डलपुर वाले की....

बाज रहे मृदिंग मजीरा

सारे जग की हर ली है पीड़ा

झूम झूम के, घूम घूम के

बिगड़ी बना दे बड़े बाबा की भक्ति करो झूम झूम के

बाबा कुण्डलपुर वाले की...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।